आज का पंचांग : स्वयं की खोज

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का विचार

मनुष्य के सुखद जीवन के लिए मस्तिष्क में सत्यता, चेहरे पर प्रसन्नता तथा हृदय में पवित्रता जरूरी हैं.!!

आज का भगवद् चिंतन
स्वयं की खोज

सब को जानो पर साथ ही साथ स्वयं को भी जानो, सबको खोजो पर साथ ही साथ स्वयं की भी खोज करो और सबके निकट रहो पर साथ ही साथ स्वयं के निकट भी पहुँचो। स्वयं से स्वयं की दूरी ही दुनिया की सबसे बड़ी दूरी है, जिसे पूरी करने में कभी-कभी जन्म जन्मांतरों के चक्कर लग जाते हैं। स्वयं तक पहुँचे बिना जीवन यात्रा का विराम भी नहीं हो सकता है।

जीवन भर बाहर की बहुत यात्राएं हुई अब भीतर के यात्री भी बनो। भीतर की यात्रा सुखद तो बहुत है, लेकिन सहज कदापि नहीं। बहुत कठिन है स्वयं से बातें कर पाना, बहुत कठिन है स्वयं की बातों को सुन पाना और बहुत कठिन है स्वयं को मित्र बनाकर स्वयं में आनंदित रहना। सब करो पर कुछ क्षण स्वयं के साथ भी अवश्य व्यतीत करो। स्वयं की खोज ही स्वयंभू बनने का मार्ग भी है।

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:42 ए एमसूर्यास्त07:16 पी एम
चन्द्रोदय06:41 ए एमचन्द्रास्त09:18 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिद्वितीया – 05:53 पी एम तकनक्षत्ररोहिणी – 11:32 ए एम तक
तृतीयामृगशिरा
योगसुकर्मा – 09:48 पी एम तककरणबालव – 07:46 ए एम तक
धृतिकौलव – 05:53 पी एम तक
वारसोमवारतैतिल – 04:03 ए एम, मई 19 तक
पक्षशुक्ल पक्षगर
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते4ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिवृषभ – 10:05 पी एम तकनक्षत्र पदरोहिणी – 06:16 ए एम तक
मिथुनरोहिणी – 11:32 ए एम तक
सूर्य राशिवृषभमृगशिरा – 04:48 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रकृत्तिकामृगशिरा – 10:05 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदकृत्तिका – 05:26 पी एम तकमृगशिरा – 03:22 ए एम, मई 19 तक
कृत्तिकामृगशिरा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 34 मिनट्स 13 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 25 मिनट्स 17 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:29 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:18 ए एम से 05:00 ए एमप्रातः सन्ध्या04:39 ए एम से 05:42 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:02 पी एम से 12:56 पी एमविजय मुहूर्त02:44 पी एम से 03:39 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:15 पी एम से 07:35 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:16 पी एम से 08:18 पी एम
अमृत काल08:44 ए एम से 10:08 ए एमनिशिता मुहूर्त12:08 ए एम, मई 19 से 12:49 ए एम, मई 19
12:56 ए एम, मई 19 से 02:20 ए एम, मई 19अमृत सिद्धि योग11:32 ए एम से 05:41 ए एम, मई 19
सर्वार्थ सिद्धि योगपूरे दिन