पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
शांति के मामले में धर्म और विज्ञान एक जगह पर सहमत हैं और वो ये कि मन पर काम किया जाए। विज्ञान कहता है माइंडसेट अगर ठीक है तो विपरीत परिस्थिति में भी आप शांत रह सकेंगे। यही बात धर्म भी अपने ढंग से कहता है। जब कथा सुना रहे थे गरुड़ जी को काकभुशुंडि तो तुलसी लिखते हैं- प्रभु अवतार कथा पुनि गाई, तब सिसु चरित कहेसि मन लाई। प्रभु के अवतार की कथा का वर्णन किया, उसके बाद मन लगाकर राम जी की बाल लीलाएं कहीं। ये जो मन लगाकर शब्द है, इसका अर्थ यह है कि मन को एकाग्र करें, नियंत्रित करें और तब कोई काम करें।
पिछले दिनों दुनिया ने दिल्ली आकर एआई पर चिंतन किया। लेकिन जो एआई के जानकार हैं, जिनके पास थोड़ी भी आध्यात्मिक समझ है, उन्होंने यह बात अवश्य कही कि मन को नियंत्रित करके आत्मा तक जाया जाए तो एआई के नुकसान नहीं होंगे। अभी तो दुनिया के जिम्मेदार लोग एआई को कंधे पर लेकर चल रहे हैं और उन्हें भी समझ नहीं आ रहा कि यह पालकी है या अर्थी?
पञ्चाङ्ग
| तिथि | द्वितीया – 03:01 ए एम, मई 04 तक | नक्षत्र | विशाखा – 07:10 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| तृतीया | अनुराधा | ||
| योग | वरीयान् – 10:28 पी एम तक | करण | तैतिल – 01:54 पी एम तक |
| परिघ | गर – 03:01 ए एम, मई 04 तक | ||
| वार | रविवार | वणिज | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 20 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | वृश्चिक | नक्षत्र पद | विशाखा – 07:10 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मेष | अनुराधा – 01:51 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | भरणी | अनुराधा – 08:32 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | भरणी | अनुराधा – 03:15 ए एम, मई 04 तक | |
| अनुराधा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 15 मिनट्स 44 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 43 मिनट्स 28 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:25 ए एम से 05:08 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:47 ए एम से 05:51 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:03 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:42 पी एम से 03:35 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:06 पी एम से 07:27 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:07 पी एम से 08:11 पी एम |
| अमृत काल | 10:21 पी एम से 12:08 ए एम, मई 04 | निशिता मुहूर्त | 12:07 ए एम, मई 04 से 12:50 ए एम, मई 04 |
| त्रिपुष्कर योग | 05:51 ए एम से 07:10 ए एम |