आज का पंचांग : धीरे-धीरे बढ़ते रहो

भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग का महत्व अति प्राचीन काल से ही रहा है। यह केवल तिथि और वार जानने का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय कालगणना, ज्योतिष और धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में पंचांग को विशेष स्थान प्राप्त है, क्योंकि इसके माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जैसे पंच अंगों का ज्ञान होता है.

इसी प्राचीन ज्ञान-परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘हिमशिखर खबर’ प्रतिदिन आपके लिए पंचांग प्रस्तुत करता है—ताकि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच हमारी कालगणना, संस्कृति और सनातन परंपराओं से हमारा जुड़ाव बना रहे.

पंडित उदय शंकर भट्ट

भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, भाद्रपद. आज है चंद्र दर्शन.

आज प्रतिपदा तिथि 07:46 AM तक उपरांत द्वितीया. नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 12:55 PM तक उपरांत हस्त. शुभ योग 03:08 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग. करण बव 07:46 AM तक, बाद बालव 07:23 PM तक, बाद कौलव. आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:51 AM है. आज चन्द्रमा कन्या राशि पर संचार करेगा.

धीरे-धीरे बढ़ते रहो

तिनका-तिनका जुड़ता है, तभी घोंसला बनता है।
बूंद-बूंद गिरती है, तभी सागर भरता है।
ईंट-ईंट रखी जाती है, तभी महल खड़ा होता है।
और कदम-कदम बढ़ते हुए ही मनुष्य हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचता है।

एक-एक फूल से माला बनती है और वही माला जब किसी के गले में पड़ती है, तो उसके सौंदर्य को और बढ़ा देती है। ठीक उसी प्रकार जीवन के छोटे-छोटे प्रयास, छोटी-छोटी सफलताएँ और निरंतर किए गए कर्म मिलकर एक दिन विजयश्री की वह माला बनाते हैं, जिसकी सुगंध पूरे जीवन को महका देती है।

इसलिए लक्ष्य की ओर सदैव गतिमान रहिए।

यदि दौड़ नहीं सकते तो धीरे चलिए,
यदि तेज नहीं चल सकते तो छोटे कदम बढ़ाइए,
लेकिन ठहरिए मत।

क्योंकि गति छोटी हो सकती है, दिशा नहीं।

बैठा हुआ बाज दिनभर एक ही वृक्ष पर बैठा रह सकता है, लेकिन चलती हुई चींटी भी अपने छोटे-छोटे कदमों से लंबी यात्रा पूरी कर लेती है। प्रकृति का नियम भी यही है—निरंतरता अंततः दूरी को पराजित कर देती है।

जीवन में हर दिन कोई बड़ा परिवर्तन दिखाई दे, यह आवश्यक नहीं। कभी-कभी एक छोटा-सा प्रयास, एक कदम, एक विचार, एक निर्णय और एक दिन का धैर्य भी भविष्य की बड़ी सफलता की नींव रख देता है।

इसलिए अपने छोटे प्रयासों को कभी छोटा मत समझिए।

आज एक कदम बढ़ाइए।
कल एक और कदम बढ़ाइए।
धीरे-धीरे अपनी राह बनाते जाइए।

हो सकता है मंजिल तक पहुँचने में समय लगे,
हो सकता है राह कठिन हो,
हो सकता है कदम कई बार लड़खड़ाएँ—

लेकिन यदि कदम रुकेंगे नहीं, तो हार भी स्थायी नहीं हो सकती।

धीरे चलो, मगर चलते रहो।
छोटा बढ़ो, मगर बढ़ते रहो।
देर हो सकती है—
लेकिन निरंतर प्रयास करने वाले की यात्रा कभी व्यर्थ नहीं जाती।