आज का पंचांग : शारदीय नवरात्रि आज से शुरू, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा;

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आश्विन.आज है नवरात्री, शरद ऋतू, चंद्र दर्शन.

आज प्रतिपदा तिथि 09:31 PM तक उपरांत द्वितीया. नक्षत्र चित्रा 10:32 PM तक उपरांत स्वाति. वैधृति योग 09:05 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग. करण किस्तुघन 09:22 AM तक, बाद बव 09:31 PM तक, बाद बालव. आज राहु काल का समय 04:34 PM – 06:01 PM है. आज 10:03 AM तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा.

शारदीय नवरात्रि आज से शुरू, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा; जानिए धार्मिक मान्यता

आज 11 अक्टूबर से नौ दिवसीय शक्ति-साधना का महापर्व, हाथी पर देवी के आगमन को सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक मानते हैं श्रद्धालु

रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना, भक्ति, उपासना और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ घटस्थापना की जाती है।

हिंदू धर्म में मां दुर्गा का प्रमुख वाहन सिंह माना जाता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर एक विशेष धार्मिक मान्यता प्रचलित है। इसके अनुसार, देवी का वाहन नवरात्रि के आरंभ और समापन के वार से निर्धारित किया जाता है।

इस वर्ष हाथी पर होगा मां का आगमन

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि रविवार से शुरू हो रही है। प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार, रविवार या सोमवार को नवरात्रि आरंभ होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आती हैं। इस आधार पर वर्ष 2026 में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है।

हाथी का धार्मिक महत्व

भारतीय धार्मिक परंपरा में हाथी को शक्ति, स्थिरता, ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मां दुर्गा का हाथी पर आगमन अच्छी वर्षा, कृषि की उन्नति, सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि का शुभ संकेत है। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाओं और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ी धारणाएं हैं, वैज्ञानिक भविष्यवाणियां नहीं।

नवरात्रि के इन पावन दिनों में श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ, मंत्र-जप और साधना के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करेंगे। यह पर्व केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मकता को त्यागने, सद्गुणों को अपनाने और शक्ति, साहस तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।