पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, भाद्रपद. आज है महालय श्राद्घ पक्ष पूर्ण and अमावस्या.
आज अमावस्या तिथि 09:19 PM तक उपरांत प्रतिपदा | नक्षत्र हस्त 09:42 PM तक उपरांत चित्रा | इन्द्र योग 10:02 PM तक, उसके बाद वैधृति योग | करण चतुष्पद 09:24 AM तक, बाद नाग 09:20 PM तक, बाद किस्तुघन | आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:46 AM है | आज चन्द्रमा कन्या राशि पर संचार करेगा.
आज एक अद्भुत आध्यात्मिक संधि पर हम खड़े हैं। एक ओर सर्वपितृ अमावस्या है—जहाँ हम अपनी दृष्टि अतीत की ओर झुकाकर उन पितरों को प्रणाम करते हैं, जिनसे हमारा अस्तित्व है; और दूसरी ओर नवरात्रि का आगमन है—जहाँ हम अपनी दृष्टि भीतर की ओर मोड़कर उस शक्ति को जागृत करने की साधना करते हैं, जो हमारे अस्तित्व में निरंतर प्रवाहित हो रही है।
पितृ-पक्ष हमें अपनी जड़ों तक ले जाता है और नवरात्रि हमें अपनी चेतना की ऊँचाइयों तक। एक हमें बताता है कि हम कहाँ से आए हैं, दूसरी पूछती है कि हम अपने भीतर की शक्ति के सहारे कहाँ तक जा सकते हैं।
कितना गहरा संबंध है इन दोनों के बीच! पितरों के प्रति श्रद्धा हमें कृतज्ञ बनाती है और माँ शक्ति की आराधना हमें सामर्थ्यवान बनने की प्रेरणा देती है। कृतज्ञता के बिना शक्ति अहंकार बन सकती है और शक्ति के बिना कृतज्ञता केवल स्मृति बनकर रह सकती है। जब श्रद्धा और शक्ति का मिलन होता है, तभी जीवन साधना बनता है।
आज हम अपने पितरों का स्मरण करते हुए केवल उनके अतीत को नमन नहीं कर रहे; हम उस जीवन-धारा के प्रति कृतज्ञ हो रहे हैं, जो उनसे हम तक पहुँची है। और नवरात्रि में प्रवेश करते हुए हम संकल्प ले रहे हैं कि इस जीवन-धारा को अधिक पवित्र, अधिक जागरूक और अधिक लोकमंगलकारी बनाएँगे।
पितरों से हमें प्राणों की विरासत मिली है; नवरात्रि हमें उन्हीं प्राणों को साधना में रूपांतरित करना सिखाती है।
यही अतीत से भविष्य की ओर, श्रद्धा से साधना की ओर और विरासत से उत्तरदायित्व की ओर बढ़ने का आध्यात्मिक संक्रमण है।