आज का पंचांग : योग एआई की बुराइयों से हमें बचाएगा

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद

आज चतुर्थी तिथि 12:45 PM तक उपरांत पंचमी | नक्षत्र अश्विनी 01:58 PM तक उपरांत भरणी | ध्रुव योग 05:04 PM तक, उसके बाद व्याघात योग | करण बालव 12:46 PM तक, बाद कौलव 11:21 PM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 01:55 PM – 03:27 PM है | आज चन्द्रमा मेष राशि पर संचार करेगा |

योग एआई की बुराइयों से हमें बचाएगा

हमारे स्वभाव की डीप लर्निंग यदि हमारे अलावा कोई दूसरा करने लगे, तो हमें बहुत नुकसान होगा। हमारा नियंत्रण उस शक्ति के हाथ में चला जाएगा। फिर वो हमें बहकाएगा, फुसलाएगा, उकसाएगा, भटका देगा और काफी हद तक भड़का देगा। इन दिनों इस शक्ति का नाम है- एआई। ये टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप करने लगी है। और सुना जा रहा है कि इसमें एक बड़ा खतरा है कि वो हमारी चारित्रिक कमजोरियों को पकड़ लेगी।

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कुछ ऐसी कमजोरियां जो हमारे अलावा दूसरे नहीं जानते, पर एआई जान जाएगा। और फिर आप इसके लिए एक आज्ञाकारी, लाभकारी व्यक्तित्व होंगे, उपभोक्ता होंगे। इसलिए हमें इसका उतना ही सदुपयोग करना चाहिए कि ये हमारा दुरुपयोग न करने लगे।

जो लोग परम-सत्ता के हाथ अपना जीवन सौंप देंगे, तो एक अज्ञात शक्ति इस ज्ञात शक्ति से उनकी रक्षा करेगी। और परम सत्ता तक जाने के लिए नियमित योग करिए। योग ही ऐसा माध्यम है, जो एआई की खूबियों का स्वागत करेगा, पर उसकी बुराइयों से हमें बचाएगा।

मनुष्य जन्म बड़ा दुर्लभ

मनुष्य जन्म बड़ा दुर्लभ है, इसमे अविनाशी परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है। परंतु क्या मालूम इसका अंत कब हो जाए। सत्यता तो यह है कि-भगवान की प्रबल माया के कारण मानव यह नहीं समझता कि मेरे सिर पर मृत्यु नाच रही है। मेरे सामने मेरे परिवार के संबंधी, मित्र, मोहल्ले, नगर आदि के सभी लोग एक-एक करके चले गए जा रहे हैं, जाने के लिए तैयार हैं। फिर मैं यहां कैसे रहूंगा ? मुझे भी तो एक न एक दिन जाना ही पड़ेगा,ऐसा विचार वह क्यों नहीं करता? भवरोग की औषधि है-भगवान नाम जप…भजन…भगवत कीर्तन।

आज का भगवद् चिन्तन
प्रभु कृपा का द्वार

ईश्वर की कृपा से ही ईश्वरीय मार्ग की प्राप्ति संभव है। साधनों से ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती है अपितु ईश्वर की कृपा से ही साधन प्राप्त होते हैं। जो लोग गुरु चरणाश्रय, नामाश्रय या कथाश्रय के बिना ईश्वर की खोज में लगे हैं उनके लिए ईश्वर की प्राप्ति रेगिस्तान में पानी को खोजने जैसा ही है। सत्संग, कथा श्रवण और नाम जप से हृदय विकार मुक्त होता है और प्रभु कृपा करने को बाध्य हो जाते हैं।

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संसार में अपनी बुद्धि, रूप, कुशलता, चातुर्यता, पद, धन किसी भी वस्तु पर अहम मत करना। ये सब तुम्हारी बुद्धि के कारण नहीं अपितु भगवद् अनुग्रह के कारण ही तुम्हें प्राप्त हुई हैं। भगवान की कथा और नाम को कभी भी छूटने मत देना क्योंकि प्रभु नाम ही इस मनुष्य जीवन की वास्तविक उपलब्धि भी है। निष्ठापूर्वक प्रभु नाम का आश्रय ही प्रभु कृपा के द्वार की चाबी है।