एक राष्ट्र, एक चुनाव की तरह ही एक राष्ट्र का रजिस्ट्रेशन जीएसटी हो

सेल्फ एक्पलॉयड टैक्स पेयर फेडरेशन की सोशल सिक्योरिटी की मांग अगर सरकार पूरा कर दे तो भारत को तीसरी ही नहीं पहली आर्थिक भाक्ति बना देंगे

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नई दिल्ली। सेल्फ एम्प्लॉयड टैक्स पेयर्स फेडरेशन (एसटीएफआई) की बैठक एफ-19, यूनाइटेड इंडिया लाइफ बिल्डिंग, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में जय भगवान गोयल, चेयरमैन (एसटीएफआई), अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, यूनाईटेड हिन्दू फ्रंट व वरिष्ठ भाजपा नेता की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में वी. डी. अग्रवाल, महासचिव, आर. के. गौड़, संयुक्त सचिव, रविन्द्र गर्ग, वित्त सचिव, राजेश्वर पैन्यूली, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं प्रवक्ता, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल, नई दिल्ली, विजय अग्रवाल, विनोद गुप्ता, अशोक कुमार, कपिल वर्मा तथा मनोज जैन उपस्थित रहे।

आगामी जीएसटी काउंसिल की प्रस्तावित मीटिंग जो 3 और 4 सितम्बर 2025 को होनी है, उस बैठक हेतु हमारी फेडरेशन के द्वारा निम्नलिखित सिफारिश करने के निर्णय लिए गएः

सरकार से अपेक्षा की गई कि जीएसटी सुधारों में अनुपालन का बोझ कम किया जाए तथा सरकारी अधिकारियों का व्यवहार संतुलित होना चाहिए और जो वर्तमान में अधिकारियों का अधिक धन संग्रह पर जोर रहता है वो नहीं होना चाहिए। व्यापारी हर तरह से सरकार को योगदान देता है इसलिए आवश्यक है कि उनकी कठिनाइयों को देखा जाए, सुलझाया जाए और उनका कागजी कार्यवाही करने का भार कम किया जाए। व्यापारियों पर कर का भार ही नहीं है अन्य भार भी है जैसे अफसरों की संतुष्टि करना, इत्यादि। अफसरों से न्यायोचित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है और अधिकारियों द्वारा की जा रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ये जरूरी है कि पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था लागू हो जैसे इनकम टैक्स की फैसलेस व्यवस्था है। जितना कंप्लायंस का बोझ व्यापारी पर कम होगा उतना ही व्यापारी व्यापार ज्यादा करके ज्यादा से ज्यादा कर सरकार को देगा जिससे भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था तक जल्दी पहुंच पाएगा।

व्यापारी की बहुत बड़ी समस्या है कि आपस में लेनदेन का समय आपसी संबंधों के अनुसार होता है। जीएसटी में 180 दिन का भुगतान न होने के कारण व्यापारियों को अनायास 18 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है जो अनुचित और अव्यवहारिक है। इसको तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

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    व्यापारी अपनी कर देयता के प्रति जिम्मेदार है और वो पूरी तरह से सरकार को कर दे रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण बढ़ता हुआ जीएसटी और इनकम टैक्स संग्रह है। इसमें एक बहुत बड़ी समस्या यह है कि यदि पिछले व्यापारी ने कर नहीं जमा किया या रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो उसका खामियाजा ईमानदार व्यापारी को भुगतना पड़ता है जिससे व्यापारियों की बहुत बड़ी कार्यशील पूंजी जीएसटी मुकदमेबाजी में फंस जाती है। इस संबंध में कई उच्च न्यायालयों ने व्यवस्था दी है कि इसका बोझ ईमानदार व्यापारी पर नहीं पड़ना चाहिए लेकिन विडंबना यह है कि उच्च न्यायालयों के आदेशों का अनुपालन जीएसटी विभाग के अधिकारियों के अड़ियल रवैए के कारण नहीं हो पा रहा है। इसके लिए सरकार सर्कुलर जारी करे।

    फेडरेशन ने ये भी आधिकारिक माँग की कि देश में अनेक छोटे व्यापारी हैं जिनको जीएसटी के नियमों का अनुपालन करने में कठिनाई होती है। इन छोटे व्यापारियों को 1 करोड़ तक रजिस्ट्रेशन से मुक्त किया जाए तथा सेवा, प्रदाताओं को 50 लाख तक रजिस्ट्रेशन से मुक्त किया जाए।

    आज की बैठक में फेडरेशन ने भा ज पा/एन डी ए की एक राष्ट्र एक चुनाव का खुलकर समर्थन किया और इसके साथ साथ ये मांग की कि जैसे एक राष्ट्र एक चुनाव होना चाहिए वैसे ही देश में एक राष्ट्र और एक रजिस्ट्रेशन जीएसटी होना चाहिए। अभी हर राज्य में व्यापार करने के लिए अलग-अलग जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है

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    फेडरेशन ने सरकार से पुरजोर शब्दों में अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि सेल्फ एम्प्लॉयड टैक्स पेयर्स की सोशल सिक्योरिटी की मांग अगर सरकार जल्द से जल्द पूरी कर दे तो देश का सेल्फ एम्प्लॉयड टैक्स पेयर भारत को तीसरी ही नहीं बल्कि विश्व की पहली आर्थिक शक्ति बनाने में अपना पूरा जोर लगा देगा क्योंकि देश का कोई भी कसबा, गांव, मोहल्ला व शहर ऐसा नहीं है जहां पर छोटा बड़ी व्यापारी सेल्फ एम्पलॉयड न रहता हो।