पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पौष कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |आज है मास शिवरात्रि|
आज चतुर्दशी तिथि 04:59 AM तक उपरांत अमावस्या | नक्षत्र अनुराधा 08:06 PM तक उपरांत ज्येष्ठा | धृति योग 03:05 PM तक, उसके बाद शूल योग | करण विष्टि 03:47 PM तक, बाद शकुनि 04:59 AM तक, बाद चतुष्पद | आज राहु काल का समय 01:42 PM – 03:01 PM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |
तन और मन पर सावधानी से काम करना चाहिए
अपने व्यक्तित्व को दो भागों में बांटें तन का हिस्सा और मन का भाग। तकनीकी विशेषज्ञता, व्यावसायिक कौशल, लीडरशिप की क्वालिटी- ये सब शरीर से जुड़े मामले हैं। जो भी सफल होना चाहता है, उसको ये बातें जीवन में उतारनी पड़ती हैं। जब शरीर इन बातों को लेकर सक्रिय होता है, तो उसको थकान आती है। और शरीर की थकान विश्राम से दूर होती है।
इसी तरह से मन भी सक्रिय होता है। और जब मन अत्यधिक सक्रिय हो जाए तो परिणाम में उदासी आती है, जिसे ध्यान से दूर करना पड़ता है। जो लोग अपने व्यक्तित्व को इन दो भागों में बांटेंगे, उनके लिए सफलता अर्जित करना आसान होगा। और जितनी वे सफलता प्राप्त करेंगे, उतनी ही उनके जीवन में शांति उतरेगी।
अभी इन दोनों बातों का औसत बिगड़ जाता है, इसलिए कामयाब लोग बेचैन पाए जाते हैं। तन पर बाहर से उतना नुकसान नहीं होता, जितना आपका ही मन तन को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए तन और मन को अलग-अलग रखते हुए बड़ी सावधानी से काम करना चाहिए।
आज का भगवद् चिंतन
शुभ कर्म करते रहें
आपके द्वारा किये गये प्रत्येक शुभ कार्य के लिए प्रकृति द्वारा आपको समय आने पर सम्मानित अवश्य किया जायेगा। आपके द्वारा संपन्न ऐसा कोई शुभ और सद्कार्य नहीं जिसके परिणामस्वरूप प्रकृति द्वारा आपको उचित फल प्रदान न किया जाये। जिस प्रकार वृक्षारोपण करने से आपको शीतल छाया और मधुर फल स्वतः प्राप्त हो जाते हैं, उसी प्रकार शुभ कार्य करने से समय आने पर सुख की प्राप्ति भी स्वतः हो जाती है।
जब-जब आपके द्वारा किसी और की भलाई के लिए निस्वार्थ भाव से कोई कार्य किया जाता है, तब-तब आपके द्वारा वास्तव में अपनी भलाई की ही आधारशिला रखी जा रही होती है। आज आप किसी जरूरतमंद के लिए सहायक बनोगे तो आवश्यकता पड़ने पर कल आपकी सहायता और सहयोग के लिए भी कई हाथ खड़े होंगे। सबकी प्रसन्नता के लिए जीने का भाव ही परमात्मा को प्रसन्न करने का मूलमंत्र भी है।
आज का विचार
लक्ष्य हमेशा सही दिशा में होना चाहिए, कार्य तो दिन-रात दीमक भी करती है, लेकिन निर्माण नहीं, विनाश करती है.