आज का पंचांग : गाय के दूध में सब कुछ है

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

पौष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष | आज है प्रदोष व्रत|

आज त्रयोदशी तिथि 02:32 AM तक उपरांत चतुर्दशी | नक्षत्र विशाखा 05:11 PM तक उपरांत अनुराधा | सुकर्मा योग 02:16 PM तक, उसके बाद धृति योग | करण गर 01:16 PM तक, बाद वणिज 02:33 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 12:22 PM – 01:42 PM है | आज 10:26 AM तक चन्द्रमा तुला उपरांत वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |

आज का विचार

मन ही मनुष्य को स्वर्ग या नरक में बिठा देता है। स्वर्ग या नरक में जाने की कुंजी भगवान ने हमारे हाथ में दे रखी है.

आज का भगवद् चिंतन
प्रभाव से नहीं, स्वभाव से जीतें

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प्रभाव से नहीं अपितु स्वभाव से ही व्यक्ति किसी के हृदय में अपना स्थाई स्थान बना पाता है। स्वभाव से ही किसी के व्यक्तित्व का वास्तविक चित्रांकन किया जा सकता है। अच्छा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल में उतार देता है तो बुरा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल से भी उतार देता है। इसलिए अपने स्वभाव को मृदु बनाओ ताकि आपका पूरा जीवन मधुरता से भर सके।स्वभाव की मधुरता जीवन को सुखमय बनाती है।

जिसका स्वभाव मधुर है, उसका जीवन भी मधुर बन जाता है। आज मनुष्य दु:खी रहता है क्योंकि वो मकान, शहर, देश, मित्र , संबंध सब कुछ बदलता है, लेकिन अपना स्वभाव नहीं बदल पाता। जीवन की सत्यता तो यही है, कि अपने स्वभाव से ही मनुष्य सुखी और दुःखी रहता है। अच्छा स्वभाव अच्छे संबधों को जन्म देते हैं और अच्छे संबंध जीवन को और अच्छा बना देते हैं। जो मनुष्य अपने बुरे स्वभाव को नहीं बदल सकता उसके लिए ये दुनिया भी कभी अच्छी नहीं बन सकती है।

हमारा राष्ट्रीय पेय क्या होना चाहिए। विदेशी चाय, अरब की कॉफी, रूस की वोदका, अमेरिका का कोक, ईरान की शराब, पश्चिम की दारू। लगभग ये सब इन देशों के राष्ट्रीय पेय बन चुके हैं। अगर सतही तौर पर कहा जाए तो भारत का राष्ट्रीय पेय चाय है। लेकिन गहराई से विचार करें तो हमें इस समय सर्वाधिक जरूरत किस बात की है।

उसका भौतिक विकास करने के लिए तो कई कर्णधार लगे हुए हैं, लेकिन हमने सदैव आत्मिक विकास में रुचि दिखाई है। और जिन्हें भी मानसिक शांति चाहिए, आंतरिक उत्साह चाहिए, जिनकी रुचि चरित्र में हो, उनको भारत का राष्ट्रीय पेय गाय का दूध ही मानना चाहिए। गाय के दूध में वो सब है, जिसे पाने के लिए लोग दुनियाभर में बावले हो रहे हैं।

हर पोषक तत्व इसमें समाया है। अग्नि का स्वभाव है कि उसमें कुछ भी डालो, वह कार्बन डाइ ऑक्साइड बना देती है। लेकिन गाय का घी अग्नि में डालें तो ऑक्सीजन बन जाता है। गाय को पशु नहीं, प्राणी मानिए और अपने प्राण बचाइए, गोमाता के माध्यम से।

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