आज का पंचांग : शिवजी और पार्वती जी से सीखें वार्तालाप की मधुरता

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

पौष कृष्ण पक्ष चतुर्थी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |

आज चतुर्थी तिथि 04:03 PM तक उपरांत पंचमी | नक्षत्र पुष्य 02:52 AM तक उपरांत आश्लेषा | ब्रह्म योग 05:01 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग | करण बालव 04:03 PM तक, बाद कौलव 03:10 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 08:19 AM – 09:39 AM है | आज चन्द्रमा कर्क राशि पर संचार करेगा |

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पति-पत्नी एक-दूसरे से बातचीत में कैसा व्यवहार करें, इसका असर परिवार और समाज पर पड़ता है। रामकथा में जब काकभुशुण्डि का प्रसंग आया- पार्वती जी प्रश्न पूछ रही थीं, शिव जी उत्तर दे रहे थे और यही रामकथा है- तो उस प्रसंग में पार्वती जी के प्रश्न पूछने का ढंग ऐसा था कि शिव जी प्रभावित हुए।

तुलसीदास जी ने लिखा- गौरि गिरा सुनि सरल सुहाई। बोले सिव सादर सुख पाई।। पार्वती जी की सरल-सुंदर वाणी सुनकर शिव जी सुख पाकर आदर के साथ बोले। अब इसमें जितने शब्द तुलसीदास जी ने प्रयोग किए हैं, वो पति-पत्नी के वार्तालाप के सम्बंधों पर बहुत अच्छा संकेत हैं।

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर कुछ लोगों ने चिंता व्यक्त की कि इस देश में पति-पत्नी अपने सम्बंधों में आपस में बहुत आक्रामक हो गए हैं। तो मैं सोच रहा था ऐसा तो भारत में भी है। कुछ पति-पत्नी के रिश्ते कभी-कभी उग्र हो जाते हैं। वार्तालाप कितना मधुर रखना है, यह शिव-पार्वती से सीख सकते हैं।

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