आज का पंचांग : उद्देश्य की पवित्रता

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का चिंतन

दुःख देने वाले तो बहुत बैठे हैं किसी को खुशी देने वाले बनना होगा। जीवन बहुत सुंदर है, उसे जीना है। प्रेम दुर्लभ है, उसे पकड़ कर रखना है। क्रोध बहुत खराब है, उसे दबा कर रखना है। भय बहुत भयानक है, उसका सामना करना है।

आज का भगवद् चिन्तन
उद्देश्य की पवित्रता

केवल परिणाम से नहीं अपितु उद्देश्य से ही कर्म की श्रेष्ठता का निर्धारण होता है। जीवन में बहुत बार यह आवश्यक नहीं होता कि अच्छे कर्म का परिणाम भी अच्छा ही मिले। एक नारी की रक्षा के लिए पक्षीराज जटायु द्वारा दशानन जैसे बाहुबली से लड़ा गया युद्ध एक अच्छा कर्म अवश्य था लेकिन उसके बावजूद भी परिणाम में जटायु को अनेक प्रहार अपने ऊपर सहकर लहुलुहान होना पड़ा।

हस्तिनापुर में दुर्योधन को समझाकर युद्ध को टालने के लिए श्रीकृष्ण का शांतिदूत बनकर जाने का निर्णय एक श्रेष्ठ कर्म होने के बावजूद भी उसके परिणाम में उन योगेश्वर श्रीकृष्ण को ही अनेक अपशब्द सुनने पड़े और उन्हें बंधक बनाने तक का प्रयास किया गया। पक्षीराज जटायु हो या भगवान श्रीकृष्ण दोनों के कार्य अच्छे थे, परिणाम भले ही अच्छा नहीं रहा लेकिन दोनों के उद्देश्य परम पवित्र थे। अच्छा कर्म वह नहीं जिसका परिणाम भी अच्छा हो अपितु अच्छा कर्म वह है, जिसका उद्देश्य पवित्र है।

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:37 ए एमसूर्यास्त07:22 पी एम
चन्द्रोदय06:49 पी एमचन्द्रास्त05:04 ए एम, मई 31
पञ्चाङ्ग
तिथिचतुर्दशी – 11:57 ए एम तकनक्षत्रविशाखा – 01:20 पी एम तक
पूर्णिमाअनुराधा
योगशिव – 05:25 ए एम, मई 31 तककरणवणिज – 11:57 ए एम तक
सिद्धविष्टि – 01:05 ए एम, मई 31 तक
वारशनिवारबव
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासपुरुषोत्तम अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते16ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशितुला – 06:39 ए एम तकनक्षत्र पदविशाखा – 06:39 ए एम तक
वृश्चिकविशाखा – 01:20 पी एम तक
सूर्य राशिवृषभअनुराधा – 08:02 पी एम तक
सूर्य नक्षत्ररोहिणीअनुराधा – 02:45 ए एम, मई 31 तक
सूर्य नक्षत्र पदरोहिणीअनुराधा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 45 मिनट्स 16 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 14 मिनट्स 30 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:30 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:15 ए एम से 04:56 ए एमप्रातः सन्ध्या04:36 ए एम से 05:37 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:02 पी एम से 12:57 पी एमविजय मुहूर्त02:47 पी एम से 03:42 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:21 पी एम से 07:42 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:22 पी एम से 08:24 पी एम
अमृत काल04:33 ए एम, मई 31 से 06:21 ए एम, मई 31निशिता मुहूर्त12:09 ए एम, मई 31 से 12:50 ए एम, मई 31
रवि योग05:37 ए एम से 01:20 पी एम