आज का पंचांग : भोलेनाथ महादेव

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

श्रावण कृष्ण पक्ष दशमी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आषाढ़.

आज दशमी तिथि 01:59 PM तक उपरांत एकादशी. नक्षत्र रोहिणी 04:51 PM तक उपरांत म्रृगशीर्षा. ध्रुव योग 09:01 AM तक, उसके बाद व्याघात योग 05:37 AM तक, उसके बाद हर्षण योग. करण विष्टि 01:59 PM तक, बाद बव 12:34 AM तक, बाद बालव. आज राहु काल का समय 09:18 AM – 10:55 AM है. आज 03:48 AM तक चन्द्रमा वृषभ उपरांत मिथुन राशि पर संचार करेगा.

अभी शिव जी का प्रिय महीना सावन चल रहा है. इस महीने में भगवान शिव की पूजा के साथ उनकी कथाओं को पढ़ने और सुनने की परंपरा भी है. शिव जी की कथाएं धर्म लाभ देने के साथ ही जीवन में सफल होने के सूत्र भी बताती है. जानिए शिव जी और अर्जुन की पौराणिक कथा, जिसमें भगवान ने अहंकार से बचने के संदेश दिया है…

महाभारत में कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध तय हो चुका था, उस समय अर्जुन दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए कठोर तप कर रहे थे. वे चाहते थे कि कौरवों से युद्ध में धर्म की रक्षा के लिए उन्हें ऐसे दिव्यास्त्र मिलें, जिनसे वे अपने कर्तव्य को पूरा कर सकें. देवराज इंद्र ने अर्जुन को बताया कि दिव्यास्त्र पाने से पहले उन्हें भगवान शिव को प्रसन्न करना होगा.

अर्जुन ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी. एक दिन उनके तप स्थल पर एक जंगली सूअर आया. वास्तव में वह एक मायावी दैत्य था, जो अर्जुन को मारना चाहता था. अर्जुन ने उसे देखकर तुरंत अपना धनुष उठाया और बाण चलाने की तैयारी की. उसी समय एक किरात वनवासी वहां पहुंचा और उसने भी उस सूअर पर बाण चला दिया.

दोनों के बाण एक साथ सूअर को लगे। इसके बाद अर्जुन और उस वनवासी के बीच विवाद शुरू हो गया। दोनों ही उस शिकार पर अपना अधिकार बता रहे थे। विवाद इतना बढ़ गया कि बात युद्ध तक पहुंच गई। अर्जुन उस वनवासी को कमजोर समझ रहा था, लेकिन अर्जुन पूरी शक्ति लगाकर भी उस वनवासी को पराजित नहीं कर सके।

वनवासी से युद्ध करते समय अर्जुन को एहसास हुआ कि सामने वाला योद्धा कोई साधारण व्यक्ति नहीं है. उन्होंने युद्ध रोककर मिट्टी का शिवलिंग बनाया और भगवान शिव की पूजा की. उन्होंने शिवलिंग पर जो माला चढ़ाई थी, वही माला उस वनवासी के गले में दिखाई देने लगी. तब अर्जुन समझ गए कि स्वयं भगवान शिव उनकी परीक्षा लेने आए थे.

अर्जुन ने भगवान शिव से क्षमा मांगी. उस समय शिव जी ने अर्जुन को अहंकार न करने की सलाह दी. इसके बाद अर्जुन ने अहंकार को त्यागने का संकल्प लिया. शिव जी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए पाशुपतास्त्र प्रदान किया. इस कथा का संदेश है कि व्यक्ति चाहे कितना भी योग्य और शक्तिशाली क्यों न हो, उसे हमेशा विनम्र रहना चाहिए.

अर्जुन ने भगवान शिव से क्षमा मांगी. उस समय शिव जी ने अर्जुन को अहंकार न करने की सलाह दी. इसके बाद अर्जुन ने अहंकार को त्यागने का संकल्प लिया. शिव जी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए पाशुपतास्त्र प्रदान किया. इस कथा का संदेश है कि व्यक्ति चाहे कितना भी योग्य और शक्तिशाली क्यों न हो, उसे हमेशा विनम्र रहना चाहिए. वास्तविक सफलता वही है, जिसमें ज्ञान, शक्ति और नम्रता तीनों का संतुलन हो.

प्रसंग की सीख

भगवान शिव और अर्जुन की यह कथा संदेश देती है कि केवल प्रतिभा और मेहनत से सफलता नहीं मिलती है, बल्कि सही सोच और अच्छा व्यवहार भी महत्वपूर्ण हैं. जीवन को बेहतर बनाने के लिए इस प्रसंग की संदेशों को व्यवहार में उतारना चाहिए…

सफलता के साथ विनम्रता बनाए रखें

अर्जुन महान योद्धा थे, लेकिन उन्हें अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था. जीवन में उपलब्धियां मिलने के बाद भी हमें घमंड नहीं करना चाहिए. विनम्र व्यक्ति ही लंबे समय तक सम्मान प्राप्त करता है.

अपनी शक्तियों का सही उपयोग करें

अर्जुन के पास अद्भुत युद्ध कौशल था, लेकिन शिव जी ने उन्हें समझाया कि शक्ति का उद्देश्य अहंकार नहीं, बल्कि धर्म और कल्याण होना चाहिए। अपनी क्षमताओं का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करना चाहिए।

हर परिस्थिति से सीखने की आदत रखें

कई बार जीवन में ऐसी घटनाएं होती हैं, जो हमें अपनी कमियां दिखाती हैं। आलोचना या कठिन परिस्थिति को अपमान न मानकर सीखने का अवसर समझना चाहिए।

जल्दबाजी में निर्णय न लें

अर्जुन ने बिना पूरी परिस्थिति समझे वनवासी से विवाद कर लिया। जीवन में बड़े फैसले लेने से पहले धैर्य और समझदारी से विचार करना जरूरी है।

दूसरों को छोटा न समझें

शिव जी ने वनवासी के रूप में आकर अर्जुन को यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके बाहरी रूप से नहीं करनी चाहिए।

आज का विचार

जीवन में कितनी भी बुरी बात क्यों न हुई हो उसे भूल जाओ. क्योंकि, उस बात से आपको उतना नुकसान नही होगा जितना उसे बार बार याद करने से होगा.

आज का भगवद् चिन्तन
भोलेनाथ महादेव

प्रत्येक स्थिति-परिस्थिति में प्रसन्न रहना भगवान शिव के जीवन से सीखना चाहिए।भगवान शिव बड़े भोले हैं और जो भोला है,वही दुनिया का नाथ बनने की पात्रता रखता है। शिवजी ने भीतर से अपने आपको इतना शक्तिसंपन्न, उच्च विचारयुक्त,धीर,गंभीर,सहनशील, धैर्यवान,मान-अपमान मुक्त बना रखा है कि संसार की कोई भी स्थितियाँ उन्हें विचलित नहीं कर पाती हैं.

शिवजी अपने हृदय में केवल राम नाम को रखते हैं,बाकी सब बाहर ही छोड़ देते हैं।जिनके हृदय में प्रभु श्रीराम हैं,उन्हीं के जीवन में विश्राम भी है।भगवान शिव अन्तर्मुखी हैं,स्वयं में स्थित रहते हैं।मजबूत बनो, ताकि हर स्थिति का मुस्कुराकर सामना कर सको।एक बात और जो भोलेनाथ अर्थात कपट रहित सरल एवं सहज है,वही दुनिया का नाथ अर्थात सबके हृदय में बस जाने वाला भी बन जाता है.