शिव के विविध स्वरूप, ज्योतिर्लिंगों की महिमा और भक्तों की कथाओं का आचार्य सीताशरण महाराज ने किया विस्तार से वर्णन
चम्बा। बगासू महादेव मंदिर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन शिव महात्म्य की अमृतवर्षा हुई। कथा वक्ता आचार्य सीताशरण जी महाराज ने भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनकी महिमा और भक्तों के प्रति करुणा का विस्तार से वर्णन कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया।
कथा के दौरान आचार्य सीताशरण महाराज ने कहा कि शिव महापुराण केवल भगवान शिव की महिमा का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति और कल्याण के मार्ग पर ले जाने वाला आध्यात्मिक प्रकाश है। इसमें भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और अवतारों के साथ ज्योतिर्लिंगों की महिमा तथा शिवभक्तों की प्रेरणादायी कथाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है।
उन्होंने भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप और उनकी उपासना के विधान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महादेव को पंचदेवों में प्रधान और परमेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। वे महादेव, शंकर और नीलकंठ जैसे अनेक नामों से पूजे जाते हैं।
कथा में भगवान शिव के जीवन चरित्र, माता पार्वती से उनके विवाह और भगवान गणेश एवं कार्तिकेय सहित पुत्रों की उत्पत्ति का भी आध्यात्मिक संदर्भों के साथ वर्णन किया गया। आचार्य ने कहा कि शिव का स्वरूप अपने भीतर सृजन, पालन और संहार—तीनों शक्तियों का समन्वय समेटे हुए है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव की भक्ति को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए सत्य, करुणा, संयम और लोककल्याण के आचरण में उतारने का आह्वान किया।
कथा के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण का श्रवण कर भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। सातवें दिन की कथा के समापन पर हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।





