पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आषाढ़. आज है आषाढ़ी एकादशी.
आज एकादशी तिथि 11:34 AM तक उपरांत द्वादशी. नक्षत्र ज्येष्ठा. ब्रह्म योग 09:08 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग. करण विष्टि 11:34 AM तक, बाद बव 12:46 AM तक, बाद बालव. आज राहु काल का समय 09:15 AM – 10:54 AM है. आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा.
आज का विचार
साधना, सेवा, सत्संग, स्वाध्याय और संयम दैनिक जीवन में न्यूनतम मात्रा में भले ही हो, पर सम्मिलित अवश्य और अनिवार्य रूप से रहने चाहिए.
आज का भगवद् चिंतन
संसार में संत
चिंता संत और संसारी दोनों के मन में होती है पर संत परमार्थ के लिए चिंतित रहता है और संसारी स्वार्थ के लिए चिंचित रहता है। संत और संसारी के बीच का जो भेद होता है, वह कर्मगत नहीं अपितु भावगत होता है। दोनों में वाह्य स्थिति का नहीं अपितु अंतःस्थिति का भेद होता है।
संसारी भी क्रोध करता है और संत भी क्रोध करता है। संसारी लोभ करता है और संत में भी लोभ देखने को मिल जाता है। संसारी भी अर्जन करता है और संत भी अर्जन करता है। संसारी यदि संग्रह करता है तो संत भी संग्रह करता है। दोनों की क्रिया में समानता होने के बावजूद भी भाव एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत होते हैं।
यदि आपके जीवन में भी संग्रह है, लोभ है पर आप अपने द्वारा अर्जित संपत्ति का उपयोग परहित – परोपकार में करते हैं। आप उन वस्तुओं का उपयोग स्वार्थ में नहीं अपितु परमार्थ में करते हैं और आप दूसरों की खुशी में ही अपनी खुशी मानते हैं तो सच समझना फिर आप संसार में रहते हुए और संसारी दिखते हुए भी संत ही हैं।