रानीचौरी परिसर में विश्वविद्यालय प्रसार परिषद की बैठक, किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर

नई टिहरी। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार की विश्वविद्यालय प्रसार परिषद की बैठक वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी में कुलपति प्रो. (डॉ.) बी. पी. भट्ट की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विश्वविद्यालय की विस्तार शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण गतिविधियों की व्यापक समीक्षा करते हुए कृषि तकनीकों को किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।


बैठक में कृषि प्रौद्योगिकियों की सूची (टेक्नोलॉजी इन्वेंटरी), मानक कार्यविधि (एसओपी), तकनीकों के प्रमाणीकरण, डिजिटल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, उद्यानिकी, मत्स्य पालन तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही विश्वविद्यालय की तकनीकों की दृश्यता बढ़ाने, किसानों के नवाचारों के दस्तावेजीकरण, त्रैमासिक तकनीकी न्यूज़लेटर के प्रकाशन तथा वार्षिक विस्तार गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।


बैठक में प्रगतिशील किसान महाबीर सिंह राणा (ग्राम बजीरा, जनपद रुद्रप्रयाग), खुशीराम डबराल (ग्राम चोपड़ियाल, जनपद टिहरी गढ़वाल) तथा एनजीओ प्रतिनिधि यशपाल सिंह रावत ने किसानों की समस्याएं प्रमुखता से उठाईं। उन्होंने जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान, नई किस्म के बीज, उन्नत पौध और आधुनिक कृषि तकनीकों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।
कृषि विभाग की ओर से निदेशक डॉ. प्रियांका सिंह, उद्यान विभाग से दीपक नेगी तथा मत्स्य विभाग से अमोद नौटियाल सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव साझा किए। बैठक में औद्यानिकी महाविद्यालय, भरसार के अधिष्ठाता डॉ. अजय कुमार जोशी, वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी के अधिष्ठाता डॉ. तारा सिंह मेहरा, निदेशक शैक्षणिक डॉ. अरविन्द बिजलवाण, सह निदेशक शोध डॉ. अमोल वशिष्ट, कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक एवं विश्वविद्यालय के शोध एवं प्रसार केंद्रों के प्रभारी भी उपस्थित रहे


बैठक के समापन पर कुलपति प्रो. (डॉ.) बी. पी. भट्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नई तकनीकों का विकास करना नहीं, बल्कि उन्हें प्रत्येक किसान तक प्रभावी ढंग से पहुंचाकर उनकी आय, उत्पादकता और आजीविका में सुधार लाना है। उन्होंने सभी महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं निदेशालयों से समन्वित, परिणामोन्मुखी और किसान-केंद्रित कार्ययोजना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।