आज का पंचांग : गुरू पूर्णिमा की अनंत शुभकामनाएं

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, सिद्धार्थि संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आषाढ़. आज है व्यास पूजा, सत्य व्रत, पूर्णिमा व्रत, पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा.

आज पूर्णिमा तिथि 08:05 PM तक उपरांत प्रतिपदा | नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 03:37 PM तक उपरांत श्रवण | प्रीति योग 11:57 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग | करण विष्टि 07:15 AM तक, बाद बव 08:05 PM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 12:33 PM – 02:11 PM है | आज चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा |

दुनियादारी के प्रति भ्रम हो तो उसका निपटारा हो भी जाता है, लेकिन जब भ्रम ईश्वर के प्रति होता है तो पूरा जीवन गड़बड़ा सकता है। काकभुशुंडिजी ने एक पंक्ति बोली- निर्गुन रूप सुलभ अति सगुन जान नहिं कोई, सुगम अगम नाना चरित सुनि मुनि मन भ्रम होई। निर्गुण रूप अत्यंत सुलभ, सहज ही समझ में आ जाने वाला है, लेकिन गुणातीत दिव्य सगुण रूप को कोई नहीं जानता।

इसलिए उन सगुण भगवान के अनेक प्रकार के सुगम और अगम चरित्रों को सुनकर मुनियों के मन में भी भ्रम हो जाता है। ईश्वर का चरित्र दो प्रकार का है- एक सुगम है, एक अगम है। सुगम यानी सरल, सुविधाजनक और अगम का अर्थ होता है पहुंच से बाहर, समझ से परे, असीम।

जब कभी जीवन में ईश्वर के प्रति ऐसी स्थिति हो तो सबसे सरल उपाय है किसी गुरु की शरण में चले जाना। और कोई गुरु न मिले तो हनुमान जी को गुरु बनाइए और हनुमान जी से जुड़कर इस प्रकार के भ्रम से अपने आप को दूर कर लीजिए।

प्रभात चिंतन

पूर्णे तटाके तृषितः सदैव
भूतेऽपि गेहे क्षुधितः स मूढः।
कल्पद्रुमे सत्यपि वै दरिद्रः
गुर्वादियोगेऽपि हि यः प्रमादी।।

भावार्थ:- शास्त्र कहते हैं कि जो मनुष्य गुरु मिलने के बाद भी प्रमादी रहे, वह मूर्ख पानी से भरे हुए सरोवर के पास होते हुए भी प्यासा, घर में अनाज होते हुए भी भूखा, और कल्पवृक्ष के पास रहते हुए भी दरिद्र है।

गुरू पूर्णिमा की अनंत शुभकामनाएं।