आज का पंचांग : महादेव और सर्प माला

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

श्रावण कृष्ण पक्ष द्वादशी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, आषाढ़. आज है सोम प्रदोष व्रत और प्रदोष व्रत.

आज द्वादशी तिथि 08:01 AM तक उपरांत त्रयोदशी तिथि 04:54 AM तक उपरांत चतुर्दशी. नक्षत्र आद्रा 12:26 PM तक उपरांत पुनर्वसु. वज्र योग 10:26 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग. करण तैतिल 08:01 AM तक, बाद गर 06:27 PM तक, बाद वणिज 04:54 AM तक, बाद विष्टि. आज राहु काल का समय 07:41 AM – 09:18 AM है | आज 04:43 AM तक चन्द्रमा मिथुन उपरांत कर्क राशि पर संचार करेगा.

प्रभात चिंतन

यथाशक्ति चिकीर्षन्ति
यथाशक्ति च कुर्वते।
न हि तेषां कृते कार्ये
विघ्नमायान्ति पण्डिताः॥

भावार्थ:- बुद्धिमान व्यक्ति अपनी शक्ति और सामर्थ्य को पहचानकर उसी के अनुसार कार्य करता है। वह असंभव कामों में अपनी शक्ति नष्ट नहीं करता और उचित कार्य में बाधाओं से घबराता नहीं।

आज का भगवद् चिन्तन

महादेव और सर्प माला

भगवान शिव गले में सर्पों की माला पहनते हैं पर कभी भी अपनी शांति का त्याग नहीं करते हैं।सर्पों की माला धारण करना अर्थात अनेक मुश्किलों को अपने ऊपर ले लेना।जीवन है तो मुश्किलें तो आएँगी,बस जो उन्हें हँसके सह लेता है,वह शिव बन जाता है और जो उन्हें नहीं सह पाता वह शव बन जाता है।मुश्किलों का समाधान उनसे मुकर जाना नहीं है अपितु मुस्कुराकर सामना करने में है।

विषम घड़ी में आप अपने चेहरे पर मुस्कान लाने की हिम्मत जुटा पाते हैं तो फिर आपकी आंतरिक शांति भंग करने की किसी में सामर्थ्य नहीं।भगवान शिव के गले में सर्पों की माला हमें यह सन्देश देती है कि मुश्किलें तो किसी को भी नहीं छोड़ती बस आप अपनी हिम्मत और मुस्कान कभी मत छोड़ना।गले में विषमता के विषधर होने के बावजूद भी आनंद और प्रसन्नता में जीना भगवान महादेव के जीवन से सीखना चाहिए।